१. परिचय
वर्तमान समय में, जब हम बीमार पडते हैं, हम ऐसे चिकित्सक के पास जाते हैं जो आधुनिक (एलोपैथिक) औषधि विज्ञान का ज्ञाता हो । वर्तमान समय में एलोपैथी ने स्वयं को पारंपरिक औषधि विज्ञान के रूप में स्थापित किया है और इस कारण अन्य वैकल्पिक चिकित्सा के संदर्भ में हमारे मन में विचार भी नहीं आते । यद्यपि वैकल्पिक चिकित्सा भी हैं, जो अनेक रोगों तथा बीमारियों से बचाती है तथा ठीक करती है । वैसी ही एक पद्धति है आयुर्वेद, जो भारत में सहस्रों वर्षों पहले विकसित हुआ । इस लेख में हम आयुर्वेद के सिद्धांत, यह कैसे विकसित हुआ, एलोपैथी से इसकी तुलना देखेंगे । साथ ही यह भी देखेंगे कि आनेवाले समय के लिए आयुर्वेद का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है ।
वर्तमान समय में, जब हम बीमार पडते हैं, हम ऐसे चिकित्सक के पास जाते हैं जो आधुनिक (एलोपैथिक) औषधि विज्ञान का ज्ञाता हो । वर्तमान समय में एलोपैथी ने स्वयं को पारंपरिक औषधि विज्ञान के रूप में स्थापित किया है और इस कारण अन्य वैकल्पिक चिकित्सा के संदर्भ में हमारे मन में विचार भी नहीं आते । यद्यपि वैकल्पिक चिकित्सा भी हैं, जो अनेक रोगों तथा बीमारियों से बचाती है तथा ठीक करती है । वैसी ही एक पद्धति है आयुर्वेद, जो भारत में सहस्रों वर्षों पहले विकसित हुआ । इस लेख में हम आयुर्वेद के सिद्धांत, यह कैसे विकसित हुआ, एलोपैथी से इसकी तुलना देखेंगे । साथ ही यह भी देखेंगे कि आनेवाले समय के लिए आयुर्वेद का अध्ययन क्यों महत्वपूर्ण है ।२. परिभाषा
आयुर्वेद शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है । आयुः जिसका अर्थ है जीवन तथा वेद अर्थात ज्ञान । इसलिए आयुर्वेद का अर्थ है, स्वस्थ जीवन जीने का ज्ञान । एलोपैथी औषधि केवल रोग का उपचार करती है; किंतु आयुर्वेद समग्र जीवनपद्धति है, जो रोग तथा रोगी दोनों का पूर्ण उपचार करती है ।
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